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हिंदी दिवस सिर्फ हिंदी का ही नहीं अपितु भाषा का दिवस है। हमें देश की सभी प्रादेशिक भाषाओं और बोलियों का सम्मान करना चाहिए। आने वाले समय में हिंदी समेत देश की सभी प्रादेशिक भाषाएँ ही युवाओं के रोजगार का माध्यम बनेंगी ।
आचार्य राजीव संगल
निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
(काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी

भारतीय संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर, 1949 को ‘हिन्दी’ को संघ की राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया । परिणामस्वरूप भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के अनुसार यह प्रावधान किया गया है कि संघ की राजभाषा ‘हिन्दी’ एवं लिपि ‘देवनागरी’ होगी । भाषा किसी भी देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं आर्थिक विकास की द्योतक होती है । जिन देशों ने अपनी भाषा में शिक्षा, शोध एवं तकनीकी का विकास किया है वे देश विकास की ओर काफी तेजी से अग्रसर हुये हैं । अतः राजभाषा हिन्दी में कार्य करना हमारा दायित्व है ।
आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है । सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में सॉफ्टवेयरों की सहायता से किसी भी भाषा में काम कर पाना संभव हुआ है । आज कंप्यूटर पर हिन्दी में काम करने की सुविधाओं में बहुत विकास हुआ है एवं सोशल मीडिया में भी हिन्दी का प्रचलन बढ़ा है । विश्व में हिन्दी बोलने एवं सीखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है । इस बहुभाषी देश में हिन्दी एक संपर्क भाषा के रूप में उभरकर सामने आयी है । विश्व पटल पर हिन्दी भाषा का सम्मान काफी बढ़ा है ।
प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिन्दी के विकास में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (का.हि.वि.) का विशेष योगदान रहा है । भाषा के क्षेत्र में तकनीकी के विकास से हिन्दी को एक नया आयाम मिला है । अनुवाद सॉफ्टवेयर, तकनीकी शब्दावली आदि के क्षेत्र में हम सदैव कार्यरत हैं । संस्थान हिन्दी में काम करने में आ रही समस्याओं को दूर करने का प्रयास करता रहा है । हमारा संस्थान हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु सदैव समर्पित रहा है ।

सतत..